Tuesday, July 21, 2009

कोई तो है वो...

कोई तो है वो...

कोई तो है वो...
मेरे लिये बहोत ख़ास है वो...

जिंदगी से ना कोई गिला
ना कोई था शिकवा..
तेरे साथ जीने के लिये
लहराती थी मुझे ये हवा...

पागल बन बैठा था तेरे लिये
और थोडा आवारा..
भूल के भी भूलना तुझे
ना था मुझे गवारा...

एक आदत सी हो गयी थी
तुम्हारा रोज सपनों मे आना..
सारे दर्द भुलाकर
मुस्कुराकर चले जाना...

काश कोई करिश्मा
फिर एक बार हो जाये..
सपनों से निकल के
कभी सामने तू आ जाये...

दिल की तमन्ना है
के तुम मेरे साथ रहो..
दिन मे हो या रात मे
देखा ये सपना काश कभी सच हो...

---------------मनोज
१८ जुलै २००९

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